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गाजा में बच्चों को बनाया जा रहा निशाना, भारत को उठानी चाहिए मुखर आवाज : सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाजा के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार की “निरंतर चुप्पी” पर सवाल उठाते हुए शनिवार को कहा कि भारत को फलस्तीनियों के समर्थन में स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए तथा गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर वैश्विक जनमत के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

सोनिया ने एक अंग्रेजी दैनिक के लिये लिखे लेख में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गाजा में बच्चों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और वहां की मानवीय स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है।

उनका कहना है कि हजारों बच्चों की मौत और तबाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि गाजा में फलस्तीनियों के विरुद्ध इज़राइली शासन नरसंहार कर रहा है। जून 2026 में, इसी आयोग ने मार्मिक ढंग से इस बात को दोहराया कि इजराइल की कार्रवाइयों का उद्देश्य गाजा में फलस्तीनियों के अस्तित्व को ही समाप्त करना है और इसके लिए उनके बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।”

इस आयोग की अध्यक्षता अब प्रतिष्ठित भारतीय न्यायविद न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर (सेवानिवृत्त) कर रहे हैं,

सोनिया गांधी के अनुसार, 94 पृष्ठों की यह रिपोर्ट पढ़ना अत्यंत पीड़ादायक है।

उन्होंने कहा, “इसमें गाज़ा में इज़राइल द्वारा की गई तबाही और उसके पीछे निहित नरसंहार की मंशा का भयावह विवरण दिया गया है। कम से कम 20,000 बच्चों की हत्या की जा चुकी है और अन्य 44,000 बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें से अनेक जीवन भर के लिए अपंग हो गए हैं। बच्चों को निशाना बनाना कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।’’

सोनिया ने लिखा है, ‘‘मारे गए या घायल हुए लोगों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं और अनेक के सिर तथा गर्दन में गोली लगने के प्रमाण मिले हैं। गाज़ा के 97 प्रतिशत विद्यालय नष्ट कर दिए गए हैं। बाल चिकित्सा अस्पतालों सहित स्वास्थ्य अवसंरचना को भी तबाह कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गर्भपात और प्रसव संबंधी जटिलताओं में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि कई पश्चिमी देशों ने फलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी है, कई देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजराइल की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन भारत इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति उपनिवेशवाद-विरोधी एकजुटता, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में देश इन मूल्यों से दूर होता दिखाई दे रहा है।

उन्होंने गाजा की एक बच्ची हिंद रजब का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना वहां की मानवीय त्रासदी और बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव का प्रतीक है।

उनके अनुसार, भारत के लोगों को फलस्तीनी बच्चों की स्थिति के बारे में जानने का अधिकार है।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता केवल नैतिक दृष्टि से निंदनीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से भी समझ से परे है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ऐसे समय में इजराइल के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र के करीब जा रहा है, जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरान और व्यापक पश्चिम एशिया में अपने ऐतिहासिक मित्रों से दूरी बना ली है और वैश्विक जनमत से खुद को अलग-थलग कर लिया है।

सोनिया गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को फलस्तीनी लोगों के समर्थन में आवाज उठानी चाहिए और गाजा तथा पश्चिमी तट की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की निरंतर चुप्पी को न तो नैतिक और न ही तार्किक आधार पर उचित ठहराया जा सकता है।

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