देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रण (E-20) लागू होने के बाद उठी शिकायतों ने केंद्र सरकार को अपनी ईंधन नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनोल वाला सामान्य पेट्रोल (Zero Ethanol Petrol) दोबारा उपलब्ध कराने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर पेट्रोलियम मंत्रालय, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और अन्य संबंधित विभागों के बीच मंथन जारी है।
माइलेज और इंजन पर असर की शिकायतें बनीं वजह
E-20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज घटने और पुराने वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ने की शिकायतें की थीं। हाल के आकलनों में यह भी माना गया है कि इथेनोल मिश्रित ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों में माइलेज लगभग 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। लगातार मिल रही प्रतिक्रियाओं और सोशल मीडिया पर बढ़ती नाराजगी के बाद सरकार अब उपभोक्ताओं को वैकल्पिक ईंधन चुनने का अवसर देने पर विचार कर रही है।
सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां
1. कीमत तय करने की चुनौती
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना इथेनोल वाले शुद्ध पेट्रोल की कीमत क्या होगी। चर्चा यह है कि E-20 पेट्रोल की तुलना में शुद्ध पेट्रोल को उसकी वास्तविक लागत पर बेचा जा सकता है, जबकि इथेनोल मिश्रित पेट्रोल की कीमत अपेक्षाकृत कम रखी जाए। इससे उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे।
2. पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त व्यवस्था
यदि तीसरे ईंधन विकल्प को मंजूरी मिलती है तो पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त स्टोरेज टैंक और नए डिस्पेंसर लगाने पड़ेंगे। इससे तेल कंपनियों की परिचालन और रखरखाव लागत बढ़ सकती है। यही कारण है कि इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।
E-25 की योजना फिलहाल टली
हालांकि हाल ही में E-22 से E-30 तक के इथेनोल मिश्रित ईंधनों के लिए मानक और कर राहत संबंधी कदम उठाए गए थे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए E-25 पेट्रोल को बाजार में उतारने की योजना फिलहाल आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।
इथेनोल ब्लेंडिंग से हुए बड़े फायदे
भारत ने निर्धारित समय से पहले E-20 लक्ष्य हासिल कर लिया था। जहां 2013-14 में पेट्रोल में इथेनोल मिश्रण मात्र 1.5 प्रतिशत था, वहीं 2025 तक इसे 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई, प्रदूषण में कमी आई और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला।
अब फोकस ‘चॉइस’ पर
इथेनोल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को जारी रखते हुए सरकार अब उपभोक्ताओं की पसंद को भी महत्व देने के संकेत दे रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो आने वाले समय में वाहन मालिकों के पास E-20 और बिना इथेनोल वाले पेट्रोल में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा हो सकती है। इससे ईंधन बाजार में एक नई व्यवस्था देखने को मिल सकती है, जहां पर्यावरणीय लक्ष्यों और उपभोक्ता संतुष्टि के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।
