कोटा जनपद पंचायत अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज अपनी कुर्सी तो बचाने में सफल रही, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा संगठन में गहरे मतभेद उजागर कर दिए हैं। 22 जून को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 16 वोट पड़े, जबकि अध्यक्ष को हटाने के लिए 18 मतों की आवश्यकता थी। महज दो वोटों से प्रस्ताव गिर गया और अध्यक्ष पद पर बनी रहीं।
25 सदस्यीय जनपद पंचायत में भाजपा के 16 और कांग्रेस के 9 सदस्य हैं। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में पड़े 16 मतों से साफ हो गया कि कांग्रेस के सभी सदस्यों के साथ भाजपा के सात सदस्यों ने भी पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अध्यक्ष सदन में अपना वास्तविक बहुमत खो चुके हैं।
राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि यह घटनाक्रम भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल के गृह क्षेत्र में हुआ। इसे संगठनात्मक अनुशासन और स्थानीय नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्रॉस वोटिंग के बाद भाजपा जिला ग्रामीण इकाई ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद उपाध्यक्ष मनोहर सिंह राज, सभापति रघुबीर आर्मी और सभापति उर्मिला प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पार्टी का आरोप है कि इन जनप्रतिनिधियों ने विपक्ष के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाकर अनुशासनहीनता की है। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भी भेजी गई है।
अविश्वास प्रस्ताव के पीछे असंतुष्ट सदस्यों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 15वें वित्त आयोग की अधिकांश राशि केवल अध्यक्ष के क्षेत्र में खर्च की गई, जबकि अन्य क्षेत्रों की अनदेखी हुई। साथ ही नए विकास कार्यों की स्वीकृति के बदले 10 से 15 प्रतिशत कमीशन मांगने और जनप्रतिनिधियों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार को भी असंतोष की बड़ी वजह बताया गया है।
भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने कहा कि प्रदेश संगठन को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है। अंतिम निर्णय मिलने के बाद अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ संगठनात्मक और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
