छत्तीसगढ़

नए श्रम कानूनों के खिलाफ देशभर में ‘काला दिवस’, रायपुर में ट्रेड यूनियनों का जोरदार विरोध

sanjari

 

नए श्रम संहिताओं की वापसी की मांग को लेकर देशभर में 1 अप्रैल को काला दिवस मनाया गया। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों और संस्थानों में भी मजदूरों ने इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाया और विरोध जताया।

रायपुर में आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक और एआईआईईए के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने “श्रम सुधार” और “Ease of Doing Business” के नाम पर नियोक्ता-समर्थक श्रम संहिताएं लाई हैं। इनका मजदूरों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को हुई बड़ी हड़ताल के बाद भी सरकार इन संहिताओं को वापस लेने या ट्रेड यूनियनों से कोई सार्थक बातचीत करने से बच रही है। कानून बनाने के समय मजदूर संगठनों से कोई सलाह नहीं ली गई। लंबे समय से भारतीय श्रम सम्मेलन भी नहीं बुलाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है।

धर्मराज महापात्र ने कहा कि ये नई संहिताएं मजदूरों को फिर से ब्रिटिश काल जैसी शोषण वाली स्थिति में धकेल रही हैं। यूनियन बनाना मुश्किल और बंद करना आसान हो जाएगा। नियोक्ताओं के गलत कामों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, काम के घंटे मनमाने ढंग से बढ़ाना, हड़ताल का अधिकार लगभग खत्म करना, फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा देना, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा मानकों को कमजोर करना और न्यूनतम वेतन को और कम करना आसान हो जाएगा। यह सब कर्मचारियों के विरोध में होगा।

आरडीआईईयू के महासचिव गजेंद्र पटेल ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे इस संघर्ष का समर्थन करें, क्योंकि लोकतंत्र में यूनियन बनाने और अधिकारों के लिए लड़ने का अधिकार बहुत जरूरी है।

सभा की अध्यक्षता आरडीआईईयू के अध्यक्ष राजेश पराते ने की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता शामिल हुए। ट्रेड यूनियनों ने संकल्प लिया कि श्रम संहिताओं की वापसी तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

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