कोरबा स्थित एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में लगातार हो रहे हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। शुक्रवार देर रात बैरियर नंबर-3 के पास एक डंपर ऑपरेटर की मौत के बाद शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात एक और बड़ा हादसा हो गया, जिसमें डंपर ऑपरेटर सत्यनारायण यादव (38) की मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, खोडरी फेस पर मिट्टी डंपिंग के दौरान सत्यनारायण का डंपर लगभग 150 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद खदान में कार्यरत डंपर ऑपरेटरों में भारी आक्रोश फैल गया। कर्मचारियों ने कोलियरी प्रबंधक कैलाश चंद्र को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसे हटाने और मृतक के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की।
विरोध के चलते रात एक बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक करीब आठ घंटे तक डंपर संचालन पूरी तरह बंद रहा। बाद में प्रबंधन द्वारा कोलियरी प्रबंधक को हटाने और परिवार को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के संबंध में आश्वासन दिए जाने के बाद स्थिति सामान्य हुई।
मृतक सत्यनारायण यादव शहर की पंप हाउस कॉलोनी का निवासी था। वह चार बच्चों का पिता था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसे वर्ष 2022 में अपने पिता, जो एसईसीएल कर्मचारी थे, के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह डंपर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था।
इस हादसे के बाद उसके चारों बच्चे पिता के साये से वंचित हो गए हैं और परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
डंपर ऑपरेटरों का आरोप है कि खदान में सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। जिस खोडरी फेस पर हादसा हुआ, वहां डंपिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए कोई कर्मचारी तैनात नहीं था। इतना ही नहीं, डंपिंग क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं थी।
बताया गया कि अंधेरे में अनुमान के आधार पर डंपर को पीछे लेते समय वाहन निर्धारित सीमा से अधिक पीछे चला गया। जैसे ही डंपर का बेड उठाया गया, पूरा वाहन पीछे की ओर खाई में जा गिरा।
कुसमुंडा खदान में बीते कुछ वर्षों और महीनों के दौरान कई गंभीर दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुसमुंडा खदान देश की बड़ी कोयला परियोजनाओं में शामिल है और यहां उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, हाल के हादसों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की होड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि डंपिंग स्थलों पर पर्याप्त रोशनी, निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित किए जाएं, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
