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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव स्वतंत्रता सेनानियों के अभूतपूर्व सहयोग को मिटाने की कोशिश

जबलपुर/ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल का नाम बदलने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने विज्ञप्ति जारी कर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। संगठन ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है।

नगर कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता प्रवक्ता रिज़वान अली कोटी ने कहा है “प्रो. बरकतउल्ला भोपाली जी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत की आजादी के लिए विदेश में गठित ‘भारत की अस्थायी निर्वासित सरकार’ के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे महान क्रांतिकारी के नाम को मिटाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह साहब, जो न केवल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे बल्कि एक लेखक एवं पत्रकार भी थे, जिनका नाम इस संस्थान से जुड़ा है, न केवल भोपाल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश में एक प्रेरणा स्रोत हैं। उनका योगदान हमारे स्वतंत्रता संग्राम की जड़ है, और उनका नाम बदलना हमारे इतिहास और विरासत के साथ घोर अन्याय है। इस फैसले से न केवल हमारी भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी कमजोर होगी।

छात्र नेता शफी खान ने कहा कि “विश्वविद्यालयों की पहचान शिक्षा की गुणवत्ता से होती है, नाम बदलने से नहीं। सरकार को चाहिए कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे, शोध को बढ़ावा दे और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए। नाम बदलने की राजनीति से छात्रों का कोई हित नहीं होने वाला।

” उन्होने मांग की है कि सरकार नाम बदलने के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन पर ध्यान दे ताकि बरकतउल्लाह साहब के नाम की गरिमा बनी रहे।

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