नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा कर दी है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने से यह फैसला लिया गया। आंदोलन खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात कर बातचीत की।
VIDEO | Delhi: Union Ministers JP Nadda and Jitendra Singh along with CJP delegation holds a joint press conference following the resignation of Dharmendra Pradhan.
CJP spokesperson Saurav Das says, "Our second demand, that all FIRs filed against all protesters, not just in… pic.twitter.com/vVskSySjrY
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2026
राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ तीन चरणों में चर्चा हुई। उनके अनुसार, संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। पहली मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लेने तथा भविष्य में कोई नया मामला दर्ज नहीं किए जाने की थी। तीसरी मांग NEET परीक्षा विवाद से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की थी। रांका ने दावा किया कि पहली मांग पूरी हो चुकी है।
मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने आंदोलन से जुड़े सभी मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने का भरोसा दिया है। उनका दावा है कि यह निर्णय केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भाजपा शासित और भाजपा समर्थित राज्यों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा। उन्होंने बताया कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर सरकार सभी दर्ज मामलों का विवरण और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कह चुकी है। उनके अनुसार, केवल दिल्ली में ही आंदोलन से जुड़े करीब 15 से 20 मामले दर्ज किए गए थे।
सौरव दास ने यह भी बताया कि CJP ने सरकार को एक लिखित ड्राफ्ट सौंपा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के सभी बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। सरकार ने मंगलवार तक इस पर औपचारिक लिखित गारंटी देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सकारात्मक पहल और मिले आश्वासन को देखते हुए संगठन ने सद्भावना के आधार पर आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि तय समयसीमा के भीतर सभी वादों को अमल में लाया जाएगा।
