दुर्ग

दुर्ग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप निलंबित, वित्तीय गड़बड़ी से लेकर फर्जी बिल तक के आरोप

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 12 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी किया। कुलदीप पर कर्मचारी के वेतन से रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने, सरकारी वाहन के इस्तेमाल में अनियमितता और विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन करने सहित कई आरोप हैं। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

कर्मचारी के वेतन से बेटे के खाते में पहुंचे 1.49 लाख रुपये

मामले में आरोप है कि विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से कुल 1,49,384 रुपये उनके बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। विश्वविद्यालय स्तर पर जांच के बाद इस संबंध में 3 अगस्त 2026 को मोहन नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसी दिन कुलदीप की गिरफ्तारी भी हुई थी। फिलहाल वे जमानत पर हैं।

सरकारी कार की मरम्मत में गड़बड़ी का आरोप

कुलदीप के खिलाफ सरकारी वाहन के कथित निजी इस्तेमाल और मरम्मत में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत भी सामने आई। उच्च शिक्षा विभाग की दो सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त सरकारी कार की मरम्मत के लिए गलत बिल प्रस्तुत किए गए और बीमा दावा करने के बजाय विश्वविद्यालय की राशि खर्च की गई। जांच में कार के ओडोमीटर में करीब 5,000 किलोमीटर की कथित छेड़छाड़ का भी उल्लेख किया गया। समिति ने संबंधित राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी।

कुलपति के अधिकारों के इस्तेमाल पर भी सवाल

पूर्व कुलसचिव पर कुलपति की अनुमति के बिना उनके अधिकारों का इस्तेमाल करने का आरोप भी है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के उल्लंघन से जोड़कर देखा गया है। इसके अलावा फर्जी पीएचडी डिग्री हासिल करने से संबंधित आरोप भी जांच के दायरे में रहे हैं।

नवा रायपुर में रहेगा निलंबन अवधि का मुख्यालय

राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत कुलदीप को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभागीय जांच के लिए अलग से आरोप पत्र जारी किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय लेनदेन, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ने की संभावना है। विभागीय जांच में आरोपों पर होने वाला निष्कर्ष आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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