उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए विस्फोटकों के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद एंटी-पोचिंग यूनिट ने कार्रवाई तेज कर दी है। टाइगर रिजर्व की टीम ने छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे चिखलापानी क्षेत्र में पोटाश बम का इस्तेमाल कर जंगली सूअर का शिकार करने के आरोप में नबरंगपुर जिले के दो लोगों को पकड़ा है। मौके से 13 जिंदा पोटाश बम, टंगिया, चाकू, हंसिया और कट्टा सहित शिकार में इस्तेमाल होने वाले औजार बरामद किए गए।
जांच में दोनों आरोपियों को कथित तौर पर विस्फोटक का इस्तेमाल कर जंगली सूअर का शिकार करने और उसके शव को काटने की स्थिति में पकड़ा गया। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत POR क्रमांक 70/22, दिनांक 29 सितंबर 2026 दर्ज किया गया। दोनों आरोपियों को 1 अक्टूबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
वन्यजीवों के साथ गश्ती दलों के लिए भी खतरा
USTR के अनुसार पोटाश बम का इस्तेमाल बेहद गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे विस्फोटक वन्यजीवों के निगलने या सक्रिय होने पर फट सकते हैं और पारंपरिक शिकार के तरीकों की तुलना में अंधाधुंध चोट और मौत का कारण बन सकते हैं। इससे दूसरे वन्यजीवों, मवेशियों तथा जंगल और पुलिस की गश्ती टीमों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा होता है।
USTR की मैदानी खुफिया जानकारी के मुताबिक यह कोई अकेली घटना नहीं है। एंटी-पोचिंग यूनिट टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों के शिकार के लिए विस्फोटकों के इस्तेमाल और निर्माण में कथित रूप से शामिल 20 से अधिक लोगों को पहले पकड़ या हिरासत में ले चुकी है। एक पुराने मामले में नगरी, धमतरी निवासी प्रकाश नेताम के परिसर की तलाशी के दौरान संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के साथ 86 स्लॉथ बियर के पंजे/नाखून भी बरामद किए गए थे।
शिकार से बढ़ सकता है मानव-वन्यजीव संघर्ष
USTR ने बताया कि विस्फोटकों से किया गया अवैध शिकार केवल वन्यजीवों की मौत तक सीमित नहीं रहता। घायल या लगातार परेशान किए गए वन्यजीवों के व्यवहार और आवागमन में बदलाव आ सकता है, जिससे उनके कृषि क्षेत्रों और मानव उपयोग वाले इलाकों में पहुंचने की संभावना बढ़ती है। ऐसे हालात में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में वन्यजीवों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की स्थिति भी बन सकती है।
तलाशी में कारतूस और संदिग्ध विस्फोटक सामग्री भी मिली
ताजा मामले में पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर एक आरोपी से संबंधित परिसर में संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान हथियार संबंधी सामग्री, 29 कारतूस, दो बम/पटाखा प्रकार की सामग्री, 20 टिकली पटाखे और अलग-अलग मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। मामले में आगे की जांच जारी है।
Explosive Substances Act में भी होगी समानांतर कार्रवाई
USTR ने स्पष्ट किया है कि विस्फोटक पदार्थों के अवैध कब्जे या इस्तेमाल से जुड़े मामलों में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर Explosive Substances Act, 1908 की लागू धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों की जांच जारी रहेगी। यानी आरोपियों के खिलाफ केवल वन्यजीव शिकार से जुड़े मामले ही नहीं, बल्कि अवैध रूप से विस्फोटक रखने, बनाने या इस्तेमाल करने से जुड़े अपराधों की भी जांच होगी, जहां साक्ष्य उपलब्ध हों।
इस कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस के साइबर सपोर्ट के साथ USTR के अधिकारी और मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्रवाई में बालगोविंद साहू, सहायक संचालक सीतानदी; गोपाल कश्यप, SDO/सहायक संचालक उदंती (मैनपुर) एवं नोडल अधिकारी एंटी-पोचिंग टीम; चंद्रबली ध्रुव, वन परिक्षेत्र अधिकारी रिसगांव; सुशील सागर, वन परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव; कविता ठाकुर, वन परिक्षेत्र अधिकारी सीतानदी; चंद्रभान साहू, डिप्टी रेंजर/सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी पूर्व एकावरी; रत्नलाल यादव, वनरक्षक एकावरी, एंटी-पोचिंग टीम के सदस्यों तथा रिसगांव परिक्षेत्र के दैनिक वेतनभोगी गश्ती एवं सुरक्षा कर्मियों का योगदान रहा।
USTR ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि संदिग्ध विस्फोटक सामग्री रखने वाले लोगों, शिकार के उपकरण लेकर घूमने वालों या रात में शिकार की गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की सूचना तत्काल वन विभाग को दें। अवैध शिकार से जुड़ी गोपनीय सूचना देने और नियमानुसार पुरस्कार प्राप्त करने के लिए USTR के उप निदेशक से 7568127875 पर संपर्क किया जा सकता है।
