नई दिल्ली। UPI पेमेंट को लेकर आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होने की चर्चा के बीच व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का आह्वान किया है। वहीं 7 अक्टूबर को GST काउंसिल की बैठक में MDR पर लगने वाले 18% GST की समीक्षा की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नए MDR सिस्टम को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
व्यापारिक संगठनों की ओर से MDR के विरोध में दुकानों पर UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढकने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, मोबाइल रिटेलर्स, ज्वेलर्स, FMCG डिस्ट्रीब्यूटर्स समेत कई व्यापारिक संगठन इस विरोध में शामिल हो सकते हैं।
क्या है नया MDR सिस्टम?
प्रस्तावित व्यवस्था में सामान्य P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR से बाहर रहेंगे। कुछ छोटे व्यापारियों और रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, इंश्योरेंस तथा कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों के लिए भी अलग प्रावधान बताए गए हैं।
₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR की व्यवस्था बताई गई है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तक हो सकती है। कुछ मामलों में ₹5 का फ्लैट MDR भी प्रस्तावित है।
₹10 हजार के UPI पेमेंट पर कितना खर्च?
उदाहरण के तौर पर यदि किसी दुकान पर ₹10,000 का UPI भुगतान किया जाता है और उस पर 0.4% MDR लागू होता है, तो MDR ₹40 बनेगा।
इस ₹40 पर 18% GST यानी ₹7.20 अतिरिक्त होगा। इस तरह मर्चेंट की कुल लागत ₹47.20 होगी। हालांकि यह GST पूरे ₹10,000 पर नहीं, बल्कि MDR की राशि पर लगेगा।
GST में पंजीकृत और पात्र व्यापारी नियमों के अनुसार MDR पर चुकाए गए GST का Input Tax Credit (ITC) भी ले सकते हैं।
क्या ग्राहक से वसूला जाएगा MDR?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक पर लगाया जाने वाला टैक्स या सेस नहीं है। उनके अनुसार MDR का भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार करेगा और इसे ग्राहक के बिल में अलग से जोड़ना व्यवस्था का उद्देश्य नहीं है।
हालांकि, वास्तविक चुनौती इस व्यवस्था को पूरे देश में प्रभावी तरीके से लागू कराने की होगी। व्यापारियों की लागत बढ़ने पर वे इसका बोझ ग्राहकों पर डालने की कोशिश करेंगे या नहीं, यह भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर असर नहीं?
NPCI के MD एवं CEO दिलीप अस्बे के अनुसार करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित नए MDR का प्रभाव नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने UPI को कुछ और वर्षों तक मुफ्त रखने की बात कही है।
इसी बीच 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर भी नजर रहेगी। रिपोर्टों के अनुसार MDR पर लगने वाले 18% GST की समीक्षा का मुद्दा बैठक में उठ सकता है, हालांकि इसे अभी औपचारिक एजेंडा के तौर पर तय नहीं बताया गया है।
अब UPI व्यवस्था को लेकर तीन तारीखें अहम हैं—2 अक्टूबर का ‘नो UPI डे’, 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक और 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR व्यवस्था। इन तीनों घटनाक्रमों से यह स्पष्ट होगा कि UPI पेमेंट की लागत को लेकर सरकार, व्यापारी और पेमेंट इंडस्ट्री के बीच आगे क्या व्यवस्था बनती है।
