अजमेर: आस्था और भाईचारे की नगरी अजमेर इन दिनों एक अजीब कशमकश से गुजर रही है। पिछले सात दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है।
नगर निगम प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है और गलियां बदबू से बजबजा रही हैं। लेकिन रविवार को दरगाह बाजार में जो कुछ हुआ, उसने न केवल प्रशासन को आईना दिखाया, बल्कि हर उस अजमेरवासी को सोचने पर मजबूर कर दिया जो अपने शहर की गंदगी का दोष सिर्फ दूसरों पर मढ़ता है।
दरअसल, पंजाब के लुधियाना से ख्वाजा गरीब नवाज की चौखट पर सजदा करने आए 40 सेवादारों के एक दल ने वह कर दिखाया, जो शहर का सिस्टम सात दिन में नहीं कर पाया।
लुधियाना से आए इस दल में बड़े व्यवसायी, सरकारी कर्मचारी और यहां तक कि दिव्यांग सेवादार भी शामिल थे। जियारत के लिए जब यह दल देहली गेट से दरगाह की ओर बढ़ा, तो मुख्य मार्ग पर चारों तरफ फैली गंदगी और कचरे के अंबार को देख इनकी रूह कांप गई।
दल के सदस्य और लुधियाना के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि हम बाबा के दरबार में हाजिरी देने आए थे, लेकिन रास्ते में गंदगी देख मन बहुत दुखी हुआ। जायरीन के पैर गंदे हो रहे थे। हमसे यह देखा नहीं गया और हमने तय किया कि जियारत से पहले हम बाबा के दरबार का रास्ता साफ करेंगे।
हैरानी की बात है कि इन वॉलंटियर्स के पास सफाई का कोई ज़रिया नहीं था। उन्होंने न तो एडमिनिस्ट्रेशन को कोसा और न ही किसी पर कमेंट किया।
उन्हें आस-पास जो भी पुरानी झाड़ू, कार्डबोर्ड या बोरे मिले, उनसे उन्होंने काम संभाल लिया। देखते ही देखते लुधियाना से आए इन मेहमानों ने दरगाह बाज़ार का कायापलट कर दिया।
कचरा इकट्ठा किया गया, बोरियों में भरा गया और सड़क किनारे सजा दिया गया, जिससे रास्ता चलने लायक हो गया। एक दिव्यांग वॉलंटियर का जोश देखने लायक था, जिसने अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद पूरी लगन से अपना काम किया।
