राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाके में स्थित मदीना मस्जिद से लगी जमीन को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। एक तरफ मस्जिद कमेटी और छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड इस जमीन को वक्फ संपत्ति बता रहे हैं, तो दूसरी ओर पिछले करीब चार दशकों से वहां निवास कर रहा परिवार इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बता रहा है। दोनों पक्षों के दावों के बाद मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है।
बताया जा रहा है कि जमीन पर रहने वाले परिवार द्वारा हाल ही में निर्माण कार्य शुरू किया गया था। परिसर में दीवार निर्माण का काम चल रहा था, जिसका मस्जिद कमेटी ने विरोध किया। कमेटी का आरोप है कि वक्फ की जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है।
मौके पर पहुंचे वक्फ बोर्ड अध्यक्ष
विवाद बढ़ने की सूचना मिलने के बाद छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज मस्जिद कमेटी के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए अतिक्रमण की बात कही।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिवार ने पेश किए अपने दावे
वहीं जमीन पर रह रहे तनवीर अहमद और उनके परिवार ने वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। परिवार का कहना है कि वे पिछले लगभग 40 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
परिवार का दावा है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में जमीन उनके नाम दर्ज है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इसी जमीन के आधार पर उन्हें लोन भी स्वीकृत हुआ है, जो उनकी मालिकाना हक को साबित करता है।
जांच के बाद होगी स्थिति साफ
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अधिकार जता रहे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। अब प्रशासनिक जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विवादित जमीन पर वास्तविक अधिकार किसका है। वहीं मस्जिद कमेटी ने इस मामले में तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है।
