छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा का विदाई समारोह बेहद भावुक और यादगार माहौल में संपन्न हुआ। अपने विदाई संबोधन के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अपने परिवार और धर्मपत्नी शालिनी सिन्हा का जिक्र करते हुए इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने अपनी इस पूरी न्यायिक यात्रा और सफलता का श्रेय अपनी पत्नी और परिवार के त्याग, समझदारी और समर्पण को दिया।
परिवार को बताया अपनी सबसे बड़ी ताकत : विदाई भाषण में चीफ जस्टिस ने कहा कि परिवार का प्यार और हर परिस्थिति में उनका साथ होना उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने साझा किया कि परिवार के संबल के कारण ही उन्हें कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने का हौसला और संबल मिला।
न्यायालयों को बताया न्याय का पवित्र मंदिर : न्यायिक संस्थाओं के स्वरूप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतें महज ईंट-पत्थर और सीमेंट की इमारतें नहीं होतीं, बल्कि ये आम आदमी की आखिरी उम्मीद और न्याय का पवित्र मंदिर हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पद और इंसान हमेशा अस्थायी होते हैं, लेकिन न्यायिक संस्थाएं स्थायी रहती हैं। इसलिए इन संस्थाओं की साख, गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है।
ऐतिहासिक और उपलब्धियों से भरा रहा कार्यकाल : चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा का करीब साढ़े तीन साल का कार्यकाल उपलब्धियों और ऐतिहासिक फैसलों से परिपूर्ण रहा। अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने रिकॉर्ड 50 हजार 228 मामलों का निपटारा किया। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में 369 से अधिक ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए गए, जो आने वाले समय में न्याय जगत के लिए एक मजबूत नजीर साबित होंगे।
