छत्तीसगढ़

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता को चुनौती

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

विपक्षी नेताओं ने अदालत से चुनाव आयोग के फैसलों से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक कराने और पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि SIR लागू करने के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।

चुनाव आयोग के फैसलों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच किसी निर्णय को लेकर असहमति रही हो, तो उससे संबंधित विस्तृत जानकारी अदालत के समक्ष पेश की जाए। विपक्ष ने यह स्पष्ट करने की मांग भी की है कि महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक सहमति से लिए गए थे या किसी अधिकारी ने अलग से निर्णय लिया।

याचिका में चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन बिंदुओं के जरिए यह जांचने की मांग की गई है कि SIR से संबंधित निर्णय संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए गए या नहीं।

फॉर्म-6 में बदलाव और बैठक के रिकॉर्ड पेश करने की मांग

मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव का मुद्दा भी याचिका का प्रमुख हिस्सा है। विपक्षी नेताओं ने अदालत से यह जानकारी सामने लाने की मांग की है कि फॉर्म में संशोधन का निर्णय किस स्तर पर और किसके द्वारा लिया गया था।

इसके साथ ही संबंधित बैठकों के मिनट्स, निर्णयों से जुड़े दस्तावेज और SIR प्रक्रिया से संबंधित अन्य रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का जोर इस बात पर है कि फैसले लेने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

SIR के फैसलों के स्वतंत्र ऑडिट की मांग

याचिका में SIR से जुड़े निर्णयों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का सुझाव दिया है, ताकि संबंधित फैसलों की संवैधानिक वैधता और प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच की जा सके।

इसके अलावा मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम और उनके नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के डिजिटल डेटाबेस की विश्वसनीयता और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

SIR पर अंतरिम रोक लगाने की अपील

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से SIR की मौजूदा प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया है। याचिका में प्रक्रिया से जुड़े फैसलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।

अब अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार और SIR के संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, याचिका में उठाए गए सवाल और मांगी गई राहतें अभी याचिकाकर्ताओं के पक्ष हैं; इन पर अदालत का अंतिम रुख सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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