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चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल : कांग्रेस बोली- ‘EC हाइजैक’, केजरीवाल का आरोप- अकेले ही संस्था चला रहे CEC ज्ञानेश कुमार

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर एक रिपोर्ट में किए गए सनसनीखेज दावों के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि एक पूरे व्यक्ति ने चुनाव आयोग को हाइजैक कर लिया है, क्या बाकी के 2 चुनाव आयुक्त केवल देखने के हैं। आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही चुनाव आयोग को चला रहे हैं।

केजरीवाल ने कहा, कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता है। तीनों आयुक्त बराबर है। मुख्य चुनाव आयुक्त के पास ज्यादा अधिकार नहीं है। रिपोर्ट कहती है कि ज्ञानेश कुमार खुद चुनाव आयोग चला रहे हैं। संधु साहब ने ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी कि आयोग की मंजूरी के बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं। एक चिट्ठी में उन्होंने कहा कि मीडिया से मुझे फैसलों के बारे में पता चल रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।

केजरीवाल ने कहा, एसआईआर के तहत 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए। ये पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है, क्योंकि चुनाव आयोग ने बहुमत से उसे मंजूरी नहीं दी। इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। नाम जोडऩे और काटने का अधिकार ईआरओ से छीन लिया गया है। दिल्ली में बैठ लोग तय कर रहे हैं कि किसका नाम रहेगा, किसका काटा जाएगा। मतदाता सूची दिल्ली के चुनाव आयोग कार्यालय से बन रही है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, सीईसी ने देश को भ्रमित किया। आज चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्था भी स्वतंत्र नहीं है। चुनाव आयोग में बहुमत से फैसले होते हैं, लेकिन सीईसी ने अपने साथियों को भ्रमित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि चुनाव आयोग बहुमत की संस्था है। ऐसे में सवाल है कि क्या एक व्यक्ति विशेष ही चुनाव आयोग को चला रहा है। सीईसी ने फॉर्म 6 को बदलकर नियमों का उल्लंघन किया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा, ज्ञानेश कुमार भारत के लोगों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आज युवा पीढ़ी बेरोजगारी और पेपर लीक का सामना कर रही है; बच्चे स्कूलों के खस्ताहाल ढांचे और मिलावटी सिरप से जूझ रहे हैं।

ऐसे संकट में लोगों को यही उम्मीद होती है कि कोई बेहतर सरकार आएगी और समस्याओं का समाधान करेगी। लेकिन अगर जिंदगी को बेहतर बनाने का यही जरिया—मतदान का अधिकार और निष्पक्ष चुनाव—उनसे छीन लिया जाए, तो लोग कहां जाएंगे?

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