उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी डिबेट्स में AIMIM का पक्ष रखने वाले आसिम वकार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
वकार करीब 2017 से AIMIM से जुड़े हुए थे और लंबे समय से पार्टी का प्रमुख चेहरा माने जाते रहे हैं। उनके कांग्रेस में शामिल होने को उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
AIMIM पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने AIMIM की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कई मौकों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सीधे मुकाबले के बजाय उसके राजनीतिक विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की भूमिका में नजर आई।
वकार ने कहा कि जब उन्होंने AIMIM ज्वाइन की थी, तब उनकी धारणा थी कि यह एक ऐसी सेक्युलर पार्टी है जो BJP के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ेगी। हालांकि, समय के साथ उनकी सोच बदलती गई।
उनके मुताबिक, उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी का फोकस BJP के खिलाफ लड़ाई से ज्यादा दूसरे राजनीतिक दलों को चुनौती देने पर था। इसी वजह से उन्होंने AIMIM छोड़ने का फैसला किया।
‘कांग्रेस के खिलाफ जाने वाला BJP को फायदा पहुंचाता है’
कांग्रेस में शामिल होने के बाद वकार ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए विपक्षी दलों के बीच एकजुटता जरूरी है।
वकार ने राहुल गांधी के समर्थन का ऐलान करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई में वह कांग्रेस के साथ खड़े हैं। उनका दावा है कि जो ताकतें कांग्रेस को कमजोर करती हैं, उनका राजनीतिक फायदा अंततः BJP को मिल सकता है।
ओवैसी पर भी साधा निशाना
आसिम वकार ने असदुद्दीन ओवैसी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि AIMIM ने जिन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन या चुनावी तालमेल किया, उनमें से कई को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कर्नाटक में एच.डी. कुमारस्वामी, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव और महाराष्ट्र में प्रकाश आंबेडकर का उदाहरण देते हुए ओवैसी की रणनीति पर निशाना साधा।
हालांकि, इन राजनीतिक दावों पर संबंधित दलों या नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है।
टीवी डिबेट्स से बनाई अलग पहचान
लखनऊ के रहने वाले आसिम वकार उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM के एक चर्चित चेहरे के तौर पर अपनी पहचान बना चुके थे। टीवी न्यूज चैनलों की बहसों में पार्टी का पक्ष रखते हुए उनके तीखे तर्क और एंकरों पर किए गए तंज कई बार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें पार्टी के सबसे पहचाने जाने वाले सार्वजनिक चेहरों में शामिल कर दिया था। ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना पार्टी के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की चर्चा
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की प्रक्रिया में पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका रही।
वकार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति के समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए AIMIM के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी लगातार राज्य में अपनी पार्टी का संगठन मजबूत करने और आगामी चुनाव में अधिक सीटों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
AIMIM के लिए क्यों अहम है वकार का जाना?
आसिम वकार का जाना केवल एक नेता के पार्टी छोड़ने तक सीमित नहीं है। वह AIMIM के ऐसे चेहरे थे जो लगातार राष्ट्रीय टीवी डिबेट्स में पार्टी का पक्ष रखते थे। इसलिए उनके कांग्रेस में जाने से पार्टी को राजनीतिक और मीडिया, दोनों स्तरों पर नुकसान पहुंचने की चर्चा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए वकार की एंट्री उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं और AIMIM के समर्थक वर्ग तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।
फिलहाल असदुद्दीन ओवैसी या AIMIM के किसी वरिष्ठ नेता की ओर से आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
SP से AIMIM और अब कांग्रेस तक पहुंचा राजनीतिक सफर
आसिम वकार का राजनीतिक सफर भी इस घटनाक्रम को खास बनाता है। AIMIM में आने से पहले वह करीब दो दशक तक समाजवादी पार्टी (SP) से जुड़े रहे थे। इसके बाद उन्होंने AIMIM का रुख किया और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाई।
अब उन्होंने समाजवादी पार्टी में वापस लौटने के बजाय कांग्रेस को चुना है। यही वजह है कि उनके इस फैसले को उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति के बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से वकार AIMIM की उत्तर प्रदेश इकाई के कामकाज और कुछ फैसलों से नाराज बताए जा रहे थे। हाल के महीनों में उनकी नाराजगी बढ़ने के साथ ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें भी तेज हो गई थीं।
अब जब उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है, तो देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम कांग्रेस और AIMIM—दोनों के चुनावी समीकरणों पर कितना असर डालता है।
