दुर्ग

करोड़ों का इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बदहाल, जिम के महंगे उपकरण चोरी

पाटन। युवाओं को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पाटन का इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आज बदहाली का शिकार है। नगर पंचायत पाटन के वार्ड क्रमांक 5 में शासकीय चंदूलाल चंद्राकर महाविद्यालय के सामने स्थित यह खेल परिसर वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहा है। रखरखाव के अभाव में भवन जर्जर हो चुका है और परिसर का अधिकांश हिस्सा सुनसान पड़ा रहता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार खेल परिसर में स्थापित हाई-टेक जिम के कई महंगे उपकरण चोरी हो चुके हैं। भवन में बिजली व्यवस्था बंद होने से अधिकांश हिस्सों में अंधेरा पसरा रहता है। बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों से भवन के कुछ हिस्सों में जाने की भी अनुमति नहीं दी जाती।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिसर की जर्जर स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव का लाभ उठाकर रात के समय कुछ असामाजिक तत्व यहां पहुंचते हैं। परिसर में शराब की खाली बोतलें एवं अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने से यहां अनैतिक गतिविधियां होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जाता है कि इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्विमिंग पूल, हाई-टेक जिम, बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस, बिलियर्ड्स रूम, आर्चरी, योगा, वेटलिफ्टिंग और जिम्नास्टिक जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई थीं। लेकिन वर्तमान में अधिकांश उपकरण उपयोग के अभाव में खराब हो रहे हैं या चोरी हो चुके हैं।

जानकारी के अनुसार परिसर के विद्युतीकरण कार्य के लिए लगभग 143.73 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बावजूद वर्तमान में परिसर में बिजली व्यवस्था प्रभावी नहीं है, जिससे पूरा भवन अंधेरे में डूबा रहता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परिसर का लाभ खिलाड़ियों और युवाओं को नहीं मिल पा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण परिसर से जिम के उपकरण, पंखे सहित अन्य सामग्री चोरी होने की बात भी सामने आई है। खिड़कियां और दरवाजे क्षतिग्रस्त हैं तथा सरकारी संपत्ति लगातार खराब होती जा रही है।

स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई, खेल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा इसे शीघ्र खिलाड़ियों के लिए शुरू करने की मांग की है। साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस परिसर की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है और इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी।

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