छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में SIR की दस्तक, BLO जुटे मतदाता सूची अपडेट में

पूरे देश में इस समय फर्जी वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान जारी है। इसी बीच छत्तीसगढ़ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल, छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य जल्द शुरू होने वाला है। SIR से पहले प्रदेश भर की मतदाता सूची के मिलान का काम शुरू हो गया है। पूरे छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के मिलान का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रदेशभर में वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूची का मिलान किया जा रहा है। दोनों मतदाता सूची के मिलान का कार्य BLO से करवाया जा रहा है। वहीं निर्वाचन पदाधिकारी जल्द ही SIR की जानकारी साझा करेंगे।

बस्तर विकासखंड में पिछले सप्ताह बीएलओ को प्रशिक्षण दिया गया

चुनाव आयोग ने मांगा सुझाव

आपको बता दें कि, बिहार में जारी SIR को लेकर मचे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया था। चुनाव आयोग ने कहा है कि पूरे देश में एक साथ इसे लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने एसआईआर में भारतीय नागरिकों को शामिल करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों का सुझाव भी मांगा है। इसके साथ ही पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए मौजूदा मतदाताओं की संख्या, पिछली SIR की तिथि व डेटा, डिजिटाइजेशन की स्थिति समेत कुल 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है।

देश में एक साथ लागू होगा SIR

मतदान केंद्रों का युक्तीकरण और कुल केंद्रों की संख्या पर रिपोर्ट देनी होगी। अधिकारियों और BLOs की नियुक्ति व प्रशिक्षण की स्थिति पर भी प्रजेंटेशन में फोकस होगा। बिहार में SIR की प्रक्रिया जारी है और यह 30 सितंबर तक पूरी होगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक तौर पर देशभर में इसे लागू करने की आधिकारिक तारीख तय नहीं की है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे देश में SIR एक साथ लागू होगा।

बिहार में जारी है SIR

24 जून को बिहार से जुड़े SIR के अपने आदेश में ही चुनाव आयोग ने पूरे देश में SIR लागू करने का जिक्र किया था। चुनाव आयोग ने बिहार से जुड़े आदेश में लिखा था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (RPA 1950) की धारा 21 तथा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत, आयोग को यह अधिकार प्राप्त है कि वह निर्वाचक नामावलियों का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का निर्देश दे सके, जिसमें मतदाता सूचियों की नई तैयारी भी शामिल है; अतः, आयोग ने अब यह निर्णय लिया है कि पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रारंभ किया जाए, ताकि निर्वाचन नामावलियों की अखंडता की संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा किया जा सके।

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