सोमवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। भक्तिपूर्ण माहौल में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व हर ओर उमंग और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना हुई। मान्यता है कि देवी शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति का प्रतीक स्वरूप हैं।
देशभर के प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कोलकाता का काली मंदिर और गुवाहाटी का कामाख्या पीठ मां के जयकारों से गूंज उठा। खास बात यह है कि इस बार नवरात्र दस दिनों का रहेगा, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन तक पड़ रही है।
घटस्थापना का शुभ संयोग
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त इस बार सोमवार की रात 1.23 बजे से शुरू होकर 23 सितंबर की आधी रात 2.55 बजे तक रहेगा। परंपरानुसार कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र का आधिकारिक आरंभ माना जाता है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में श्रद्धालुओं का सैलाब
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नवरात्रि की रौनक देखते ही बन रही है।
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मध्यप्रदेश: शारदा माता मंदिर, सकलनपुर का विजयासन देवी मंदिर, उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर और दतिया का पीतांबरा पीठ भक्तों से खचाखच भरे हुए हैं।
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छत्तीसगढ़: डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी मंदिर में सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। बिलासपुर के महामाया मंदिर और रायपुर के समलेश्वरी मंदिर में भी पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
आस्था से जुड़ा उत्सव
नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक जीवन का जीवंत उत्सव भी है। शक्ति की उपासना से जुड़े इस पर्व में भक्ति, संगीत, गरबा और सामाजिक समागम की रंगीन छटा हर जगह देखने को मिलती है।
