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जल संरक्षण की दिशा में कदम, तरीघाट एनीकेट में शुरू हुआ पानी का भंडारण

  • तरीघाट एनीकेट के गेट बंद कराने पंचायत का अहम फैसला, क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मत भी शुरू

पाटन। बरसात का मौसम समाप्त होते ही अब गांवों में गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में पुरातात्विक गांव तरीघाट में ग्राम पंचायत ने खारून नदी के जल को सुरक्षित रखने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। पंचायत के निर्णय के बाद खारून नदी पर बने तरीघाट एनीकेट के गेटों को बंद किया जा रहा है, जिससे नदी का पानी एनीकेट में एकत्रित होना शुरू हो गया है।

ग्राम पंचायत का मुख्य उद्देश्य बरसात के बाद नदी में उपलब्ध पानी को व्यर्थ बहने से रोककर आगामी गर्मी के दिनों के लिए सुरक्षित रखना है। पंचायत का मानना है कि यदि अभी से पानी का भंडारण किया जाए तो गर्मी के दौरान ग्रामीणों को निस्तारी कार्यों तथा पशुओं के लिए पानी की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

पंचायत ने संभाली जिम्मेदारी

एनीकेट में पानी रोकने का निर्णय ग्राम पंचायत स्तर पर लिया गया है। पंचायत द्वारा गेट बंद कराने के साथ ही एनीकेट की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बरसात के दौरान पानी के तेज बहाव के कारण एनीकेट के कुछ गेटों में खराबी अथवा क्षति होने की स्थिति को देखते हुए उनकी मरम्मत का काम भी शुरू कराया गया है। पंचायत का प्रयास है कि जलभराव शुरू होने से पहले आवश्यक मरम्मत पूरी कर ली जाए, ताकि पानी का अनावश्यक रिसाव न हो और एनीकेट में अधिक से अधिक पानी सुरक्षित रखा जा सके।

गर्मी में ग्रामीणों और मवेशियों को मिलेगा लाभ

तरीघाट में खारून नदी ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। गर्मी के दिनों में नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही निस्तारी और पशुओं के पानी की समस्या सामने आती है। ऐसे में एनीकेट में अभी से पानी रोकना ग्रामीणों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। एनीकेट में पर्याप्त जलभराव रहने से ग्रामीणों को दैनिक निस्तारी कार्यों के लिए पानी उपलब्ध रहेगा, वहीं खेतों और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले लोगों को भी अपने मवेशियों के लिए पानी उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

पानी को रोकने से भूजल स्तर को भी मिल सकता है सहारा

एनीकेट में लंबे समय तक पानी रुके रहने से आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर को भी सहारा मिलने की संभावना रहती है। पानी का लगातार जमीन में रिसाव होने से आसपास के कुएं, बोर और अन्य जलस्रोतों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। यही वजह है कि पंचायत ने बरसात समाप्त होते ही पानी को रोकने की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया है।

क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मत पर भी जोर

बरसात के दौरान तेज बहाव के कारण एनीकेट के गेटों पर दबाव पड़ता है, जिसके चलते कुछ गेटों में खराबी आने की स्थिति बन जाती है। पंचायत द्वारा ऐसे गेटों की मरम्मत का काम भी शुरू कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलभराव के दौरान पानी के रिसाव को रोकना और एनीकेट की संरचना को बेहतर स्थिति में बनाए रखना है।

ग्राम पंचायत का यह प्रयास केवल पानी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध जलस्रोत का गर्मी तक बेहतर प्रबंधन करने की दिशा में है। समय रहते गेट बंद करने और आवश्यक मरम्मत कराने से एनीकेट में पानी का भंडारण बनाए रखने में मदद मिलेगी।

पंचायत की पहल से उम्मीद है कि आने वाले गर्मी के मौसम में तरीघाट के ग्रामीणों और मवेशियों को पानी के लिए होने वाली परेशानी को कम किया जा सकेगा।

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