गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से सागौन की अवैध तस्करी का अनूठा मामला सामने आया है। तस्करों ने सागौन के लट्ठों की अस्थायी बेड़ी बनाकर नदी के बहाव के सहारे इसे पड़ोसी राज्य ओडिशा भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन वन विभाग की स्मार्ट सर्विलांस और सतर्कता से तस्करी की कोशिश नाकाम हो गई।
मामला 22 अगस्त का है, जब उत्तर उदंती परिक्षेत्र के कुर्रुभाटा बीट में गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को सागौन के पेड़ का ताजा कटा ठूंठ मिला। नदी किनारे सागौन का भारी लट्ठा अर्जुन के पेड़ की जड़ों से रस्सी के सहारे बंधा मिला। इसके बाद इलाके में निगरानी बढ़ाई गई।
26 अगस्त को सर्विलांस के दौरान दो संदिग्ध सागौन के लट्ठे के आसपास नजर आए। तकनीकी निगरानी और जांच के बाद उनकी पहचान भोजलाल नागेश और गंगाराम विश्वकर्मा के रूप में हुई। पूछताछ में ओडिशा तक लकड़ी पहुंचाने की योजना का खुलासा हुआ। जांच आगे बढ़ी तो ओडिशा निवासी शोभाचंद्र नायक की संलिप्तता भी सामने आई, जिसे पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया गया।
वन विभाग ने आरोपियों की निशानदेही पर सागौन के लट्ठे, हाथ आरे और चिरान की गई साल की लकड़ी बरामद की। गंगाराम से जुड़े मामले में करीब 0.95 घनमीटर सागौन भी जब्त किया गया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। वहीं तीन अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
