बिलासपुर। जल संकट की भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए बिलासपुर जिला प्रशासन ने भू-जल संवर्धन के लिए एक अभिनव और तकनीक आधारित अभियान शुरू किया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशन में जिले में पहली बार आधुनिक डिजिटल तकनीकों की मदद से ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां वर्षा जल को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाकर भू-जल स्तर बढ़ाया जाएगा।
प्रशासन ने युक्तधारा पोर्टल और भूवन एप के संयुक्त उपयोग से जिले के विभिन्न हिस्सों में फैक्चर जोन चिन्हित किए हैं। इन स्थानों पर 334 इंजेक्शन वेल बनाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से बारिश का पानी सीधे भू-जल स्रोतों तक पहुंचेगा। यह व्यवस्था वर्षा जल के संरक्षण और भू-जल रिचार्ज को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले के 12 प्रमुख उद्योगों से इस अभियान में भागीदारी करने की अपील की है। इसके तहत कई स्थानों पर बोर खनन और इंजेक्शन वेल निर्माण का कार्य दिन-रात जारी है। साथ ही मनरेगा के तहत मिनी परकुलेशन टैंक भी बनाए जा रहे हैं, जिससे जल संचयन की क्षमता और अधिक बढ़ सके।
प्रशासन का मानना है कि यदि बारिश के पानी को संरक्षित कर जमीन के भीतर पहुंचाया जाए तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट, सिंचाई की समस्या और गिरते भू-जल स्तर पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यही कारण है कि इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़कर प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।
विशेषज्ञों के अनुसार इंजेक्शन वेल तकनीक वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोककर सीधे जमीन के भीतर पहुंचाती है, जिससे भू-जल भंडार मजबूत होते हैं। प्रशासन की यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
