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सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाई दवाइयों पर ‘एक राष्ट्र–एक दाम’ की मांग

रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने दवाइयों पर ‘एक राष्ट्र–एक दाम’ की मांग की है। सोमवार को नई दिल्ली में रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने तथा आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए कई मौलिक, दूरदर्शी और जनकल्याणकारी सुझाव रखे, जिन्हें समिति ने अत्यंत गंभीरता से सुना।

बैठक में देश में दवाओं की कीमतों में वृद्धि के विशेष संदर्भ में एनपीपीए की भूमिका, कार्यों और कर्तव्यों की समीक्षा हुई। इस दौरान औषध विभाग एवं एनपीपीए के उच्च अधिकारियों ने समिति के समक्ष मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया।

देश में दवाइयों के ‘एक राष्ट्र–एक दाम’ की आवश्यकता पर जोर
बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में दवाइयों की खरीद अलग-अलग दरों पर होती है, जिससे न केवल व्यवस्था जटिल होती है बल्कि मरीजों की सुविधा भी प्रभावित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि, “देश में दवाइयों की खरीदी का सिस्टम एक जैसा हो और केंद्र स्तर पर एकीकृत व्यवस्था बने। इससे पूरे देश में दवाइयों का एक दाम तय हो और राज्यों को बार-बार अलग-अलग टेंडर नहीं करने पड़ें। यह व्यवस्था मरीजों को दवाई की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी और पारदर्शिता को बढ़ाएगी।”

उनका यह सुझाव स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एक्सपायरी दवाओं के निस्तारण की राष्ट्रीय नीति का प्रस्ताव
सांसद अग्रवाल ने देशभर के सरकारी अस्पतालों में बड़ी मात्रा में पड़ी एक्सपायरी दवाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि, “एक्सपायरी दवाओं का उचित निस्तारण नहीं होने से पर्यावरण, मिट्टी और जल स्रोत गंभीर रूप से प्रदूषित होते हैं। अतः केंद्र सरकार को ऐसी दवाओं को वापस लेने और नष्ट करने के लिए कंपनियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।”

उन्होंने साफ कहा कि एक्सपायर दवाओं को खुले में फेंकना न सिर्फ खतरनाक है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है।

बीजापुर और रायपुर की घटनाओं का संज्ञान
बैठक में सांसद ने अक्टूबर माह में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की दृष्टि जाने तथा रायपुर में 9 लोगों की आंखें खराब होने की घटनाओं को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा “यदि दवा एक्सपायर है, तो उसके लिए वही कंपनी जिम्मेदार होगी। ऐसी दवाओं के निस्तारण और जवाबदेही की सख्त नीति अनिवार्य है। मरीजों की जिंदगी से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।”

सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा उठाए गए ये मुद्दे यह दर्शाते हैं कि वे न केवल अपने संसदीय क्षेत्र बल्कि पूरे देश की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत एवं सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर सक्रिय और संवेदनशील हैं। समाज के सबसे कमजोर वर्ग, मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देना उनके समर्पित जनप्रतिनिधित्व का प्रमाण है।

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