

डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने एक बेहद जटिल और जोखिमपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल की टीम ने एक मरीज के शरीर से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर निकालकर उसे नई जिंदगी दी।
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और सर्जन डॉ. संतोष सोनकर और विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सूक्ष्म योजना, समन्वय और उच्च तकनीकी दक्षता के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
15 साल से झेल रहा था दर्द
जांजगीर-चांपा निवासी 44 वर्षीय मरीज पिछले करीब 15 वर्षों से पीठ पर बढ़ते हुए इस विशाल ट्यूमर के साथ जीवन जी रहा था। समय के साथ यह गांठ इतनी बड़ी हो गई कि उसके लिए चलना-फिरना, बैठना और सोना तक मुश्किल हो गया था। शारीरिक कष्ट के साथ उसे मानसिक और सामाजिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा था।
टीमवर्क से मिली सफलता
ऑपरेशन से पहले मरीज की विस्तृत जांच और बहु-विभागीय तैयारी की गई। सर्जरी टीम में डॉ. राजेंद्र रात्रे, डॉ. मयंक भूषण मिश्रा और डॉ. प्रेक्षा जैन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया टीम डॉ. जया लालवानी और डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
सर्जरी से जुड़े एक चिकित्सक ने बताया कि मेडिकल रिकॉर्ड में भारत में अब तक लगभग 8 किलोग्राम तक के ट्यूमर हटाने के मामले सामने आए हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा करीब 22 किलोग्राम तक दर्ज है। ऐसे में 10.30 किलोग्राम का ट्यूमर निकालना देश के संदर्भ में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ऑपरेशन के बाद बेहतर रिकवरी
सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर रही और चिकित्सकीय निगरानी में उसे स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्षों से दर्द झेल रहे मरीज के चेहरे पर राहत और आत्मविश्वास लौट आया।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की मिसाल
इस उपलब्धि पर डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की क्षमता, टीमवर्क और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि जटिल से जटिल सर्जरी भी पूरी दक्षता के साथ यहां संभव है।
