रिजर्व बैंक द्वारा लंबे समय के बाद रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती तय मानी जा रही है। हालांकि, इसका असर कम से कम इस साल कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) ब्याज पर पड़ने की उम्मीद नहीं है। श्रम मंत्रालय से मिले संकेतों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में ब्याज दर भले ही न बढ़े, लेकिन पिछले साल के मुकाबले इसमें कमी आने की भी संभावना नहीं है।
इसका साफ मतलब है कि चालू वित्त वर्ष में ईपीएफ निवेश में स्थिरता रहेगी और 2024-25 में ईपीएफ पर 8.25 फीसदी ब्याज मिलना लगभग तय है। चालू वर्ष के लिए ईपीएफ ब्याज दर पर आधिकारिक फैसला अगले सप्ताह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 के लिए अपनी आय और व्यय का पूरा अनुमान लगाने के बाद ईपीएफओ ने प्रस्तावित ब्याज दर को लेकर श्रम मंत्रालय के साथ चर्चा पूरी कर ली है।
रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों द्वारा निवेश जमा और लोन पर ब्याज दरों में कटौती की संभावना को देखते हुए कयास लगाए जा रहे थे कि इसका असर ईपीएफ ब्याज पर भी पड़ेगा। श्रम मंत्रालय इसके पक्ष में नहीं हालांकि सामाजिक सुरक्षा की सबसे बड़ी सुविधा माने जाने वाले ईपीएफ पर ब्याज के मामले में श्रम मंत्रालय चालू वित्त वर्ष के आखिरी दो महीनों के रेपो रेट के आधार पर फैसला लेने के पक्ष में नहीं है।
हाल ही में ईपीएफओ ने श्रम मंत्रालय के समक्ष चालू वर्ष के अपने आय-व्यय का विस्तृत ब्योरा पेश किया, जिसमें मौजूदा और भविष्य के निवेश भी शामिल हैं। समझा जाता है कि इस मुद्दे पर ईपीएफओ के साथ हुई बैठक में श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी ईपीएफ पर ब्याज में स्थिरता बनाए रखने की राय जाहिर की।
ईपीएफ में साढ़े छह करोड़ से ज्यादा सदस्य आपको बता दें कि ईपीएफ में इस समय साढ़े छह करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और राजनीतिक रूप से ईपीएफ ब्याज हमेशा से ही संवेदनशील मुद्दा रहा है। हालांकि, पिछले साल सितंबर में पूंजी बाजार में तेजी और बैंकों द्वारा सावधि जमा पर आठ प्रतिशत से अधिक ब्याज दिए जाने को देखते हुए मंत्रालय में चालू वर्ष के दौरान ईपीएफ पर 8.40 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की संभावना जताई गई थी। लेकिन पिछले पांच महीनों से पूंजी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और रेपो दर में भी 0.25 प्रतिशत की कमी आई है।
मंत्रालय ने दी मंजूरी ऐसे में 2023-24 की तरह इस साल भी ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत ब्याज बनाए रखना जरूरी है। श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ के ब्याज दर प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है, जिस पर 28 फरवरी को सीबीटी की बैठक में विचार कर निर्णय लिया जाएगा। ब्याज दर तय करने के प्रस्ताव को सीबीटी ही मंजूरी देता है।
सीबीटी की सिफारिश पर अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय लेता है। आमतौर पर वित्त मंत्रालय सीबीटी की सिफारिशों को मंजूरी देता है और इसके बाद ही ईपीएफ पर चालू वर्ष के लिए ब्याज की राशि सदस्यों के खाते में जमा की जाती है।
