देशरायपुर

12 फरवरी को मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल,

केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों के खिलाफ़, देश भर के मज़दूर 12 फरवरी, 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल ।

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र एसोसिएशनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म ने 9 जनवरी को हुए मज़दूरों के राष्ट्रीय सम्मेलन में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा का भी पूरा समर्थन है। किसान संगठन भी ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में विरोध और बड़े आंदोलनों में शामिल होंगे।

संयुक्त मंच के अनुसार सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, औद्योगिक क्षेत्रों सहित लगभग सभी क्षेत्रों में हड़ताल (Workers’ Strike) की तैयारियां जोरों पर हैं। औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र, ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर जन आंदोलन किए जाएंगे।

ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से जारी विज्ञप्ति में संयोजक धर्मराज महापात्र ने कहा कि यह हड़ताल (Workers’ Strike) ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियनों को कमजोर करने और श्रमिक आंदोलन को निहत्था करने के उद्देश्य से चार श्रम संहिताएं और उनके नियम अधिसूचित किए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन श्रम संहिताओं को बिना उचित विधायी प्रक्रिया, बिना हितधारकों से परामर्श और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना लागू किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का खुला उल्लंघन है। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब विरोध प्रदर्शनों पर रोक थी, तब इन कानूनों को संसद में जबरन पारित किया गया।

संयुक्त मंच का कहना है कि ये श्रम संहिताएं सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने और हड़ताल के अधिकार को छीनने के लिए लाई गई हैं। इनके लागू होने से लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे श्रमिक नियोक्ताओं की दया पर निर्भर हो जाएंगे। व्यावसायिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और वेतन सुरक्षा जैसे अधिकार लगभग समाप्त हो जाएंगे।

संयुक्त मंच ने आम जनता से 11 फरवरी की मशाल रैलियों में शामिल होकर और 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाकर मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है।

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