छत्तीसगढ़राजनीति

कांग्रेस ने किया ‘सद्बुद्धि यज्ञ’: मंत्री और विधायक का पोस्टर हाथ में लेकर कांग्रेसियों ने किया हवन

रायपुर में एनआईटी चौपाटी को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस ने आज भाजपा पर निशाना साधते हुए अनोखा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनआईटी चौपाटी स्थल पर ही ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के मंत्री अरुण साव और विधायक राजेश मूणत के पोस्टर हाथ में लेकर हवन किया और भगवान से उन्हें सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। उपाध्याय ने इस घटना को सत्ता के अहंकार का नतीजा बताते हुए कहा कि 6 करोड़ 12 लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर व्यवसायियों और छात्रों के भविष्य को कुचला गया है। यह विरोध भाजपा को खुली चुनौती देने का हिस्सा है, जहां कांग्रेस ने राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान विकास उपाध्याय ने तीखे सवाल उठाए कि फूड कोर्ट को गिराने का आदेश क्यों दिया गया, जबकि मंत्री अरुण साव ने खुद विधानसभा में माना था कि फूड कोर्ट गैर-कानूनी नहीं है।

उन्होंने कहा कि साइंस कॉलेज के पास का फूड कोर्ट हजारों छात्रों को खाने की सुविधा और सैकड़ों युवाओं को रोज़गार देता था, और उसे बिना किसी वैकल्पिक इंतज़ाम के गिरा दिया गया। उपाध्याय ने मांग की कि मंत्री साव और मुनत नुकसान की भरपाई करें, प्रभावित दुकानदारों को मुआवज़ा मिले और फूड कोर्ट को फिर से बनाया जाए। कांग्रेस पार्टी इस फैसले को मनमाना बता रही है और बीजेपी नेताओं पर अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है।

यह विवाद नवंबर 2025 में शुरू हुआ, जब 21-22 नवंबर को नगर निगम की टीम ने साइंस कॉलेज मैदान स्थित चौपाटी को आमानाका ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट करने के लिए बुलडोजर चलाया। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस चौपाटी में 60-70 दुकानें थीं, जिन्हें तोड़ने के दौरान भारी हंगामा हुआ। कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय समेत कई कार्यकर्ता और व्यापारी जेसीबी के सामने लेट गए जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें हिरासत में लिया और सेंट्रल जेल भेजा। विरोध के दौरान झूमाझटकी हुई और पूर्व विधायक को घसीटते हुए गाड़ी में डाला गया। भाजपा इसे अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई बताई, जबकि कांग्रेस का दावा है कि यह छात्रों और युवाओं के हितों पर हमला है।

कुछ दिन पहले भाजपा नेताओं ने इन आरोपों का खंडन किया था, विधायक राजेश मूणत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि चौपाटी शुरू से अवैध थी और जमीन खेल विभाग की थी, जहां अब 1000 सीटर की आधुनिक नालंदा-2 लाइब्रेरी बनेगी, जिसका टेंडर पूरा हो चुका है। लेकिन विधानसभा में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एक सवाल के जवाब में ये स्वीकारा था की चौपाटी वैध थी।

विपक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जिसमें अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जो पहले अनुमति दे चुके थे। कांग्रेस का कहना है कि यह जनता के साथ विश्वासघात है। यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, जिसमें रेलवे का भी जमीन पर दावा है। विकास उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं के हितों से खिलवाड़ जारी रहा तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।

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