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I Love Muhammad बैनर लगाने के आरोप में 20 मुस्लिमों पर FIR; ओवैसी बोले– “जुर्म है तो हर सजा मंज़ूर”

आई लव मोहम्मद का बोर्ड लगाने के आरोप में नौ नामजद और 17 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ओवैसी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 20 से अधिक मुसलमानों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की कड़ी आलोचना की है।

इस पर हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर पुलिस उपायुक्त को टैग करते हुए लिखा कि आई लव मोहम्मद जुर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर यह जुर्म है तो इसकी हर सजा मंजूर है। ओवैसी ने एक्सपर्ट पोस्ट कर लिखा तुम पर मैं लाख जान से कुर्बान या रसूल बर आए मेरे दिल के भी अरमान या रसूल क्यों दिल से मैं फिदा ना करूं जान या रसूल रहते हैं इसमें आपके अरमान या रसूल यह मुकदमा कानपुर जिले के रावतपुर थाना क्षेत्र में मिलाद उल नबी के जुलूस के दौरान लगाए गए आई लव मोहम्मद बैनर को लेकर दर्ज किया गया।

ओवैसी ने इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करते हुए एक पोस्ट शेयर किया जिसमें लिखा तुम पर मैं लाख जान से कुर्बानियां रसूल। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ इस तरह की एफआईआर ना सिर्फ पक्षपाती बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाली है। पूरे मामले की बात करें आपको बता दें 5 सितंबर को देश के कई राज्यों में मिलाद उल नबी के मौके पर शहरों और कस्बों में जुलूस निकाले गए थे। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कानपुर में भी मिलाद उल नबी के मौके पर जुलूस निकाला गया था।

कानपुर के सैयद नगर में हुए जुलूस के दौरान यह बैनर सार्वजनिक सड़क पर लगाया गया। यही वह सड़क है जहां सभी समाज के जुलूस भी निकलते हैं। रिपोर्ट की मानें तो कुछ दक्षिणपंती कार्यकर्ताओं ने इस बैनर पर आपत्ति जाहिर की। वकील मोहम्मद इमरान खान ने मीडिया को बताया कि मोहित बाजपेई नाम के व्यक्ति ने इस बैनर को नई परंपरा और आपत्तिजनक बताया और इसे फौरन हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहित बाजपेई एक सीरियल अपराधी हैं जिसने मौके पर हंगामा कर माहौल बिगड़ने का काम किया।

पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और कई घंटे बाद बैनर को हटा दिया गया। हालांकि एफआईआर सिर्फ मुस्लिम पक्ष पर दर्ज की गई और वाजपेई समेत हिंदू संगठनों के सदस्यों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। वकील खान ने कहा हमारी शिकायत दर्ज नहीं की गई। जो लोग हंगामा और सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहे थे, वह खुलेआम घूम रहे हैं। जबकि पीड़ितों को ही आरोपी बना दिया गया है।

इसी मामले को लेकर ओवैसी यूपी पुलिस पर भड़के हैं। जिस घटना बाबत आप बात कर रहे हैं, वह 12 रबिउल अव्वल के दौरान अह सैयद नगर जफर वाली गली में एक समुदाय विशेष के लोगों ने एक बड़ा साइन बोर्ड लगा रखा था और कुछ लोगों को उसको आपत्ति थी कि विगत वर्षों में ऐसा नहीं था और नई परंपरा डाली गई है।

इस संबंध में शासन प्रशासन के भी निर्देश थे कि कोई नई परंपरा ना प्रारंभ की जाए। जांच में यह पाया गया था कि यह नई परंपरा के अंतर्गत था और यह भी आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों लड़कों द्वारा कुछ पोस्टर भी फाड़े गए थे। इस प्रकरण में वहां के जो एसआई पंकज शर्मा है हल्का इंचार्ज उनके तहरीर पर आठ नामजद और 101 अज्ञात लोगों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचनात्मक कारवाई की जा रही है।

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