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भारत में अमेरिकी कंपनी बोइंग ने कर्मचारियों की छंटनी : 180 कर्मियों को टेक्नोलॉजी सेंटर से निकला बाहर

बेंगलुरू में अपने इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी सेंटर से एयरक्राफ्ट बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग ने 180 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। दरअसल ये कंपनी दुनिया भर के अपने ऑफिसेज में कर्मचारियों की संख्या कम कर रही है। बतादें कि भारत में बोइंग के लगभग 7000 से अधिक कर्मचारी हैं। बेंगलुरु और चेन्नई में बोइंग इंडिया इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (बीआईईटीसी) जटिल आधुनिक वैमानिकी काम काज करता है।

इन चुनौतियों का कर रही सामना :

बेंगलुरु का इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी परिसर अमेरिका के बाहर कंपनी के सबसे बड़े निवेश में से है। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में बोइंग 300 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से सालाना करीब 1.25 अरब डॉलर की खरीद करती है।कंपनी ने कहा कि कुछ पुराने रोल खत्म किए जाने के साथ कुछ नए रोल भी क्रिएट किए गए हैं। भारत में ग्राहक सेवा, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर फोकस रखते हुए कंपनी ने इंटनी अधिक संतुलित तरीके से की है।

एडजस्टमेंट के पद प्रभावित :

बता दें कि बेंगलुरु और चेन्नई में बोइंग इंडिया इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर में एडवांस्ड एयरोस्पेस बनाने का काम होता है। बताया जा रहा है कि वर्तमान समय में बोइंग वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रही है।कंपनी ने पिछले साल अपने वर्कफोर्स में 10 प्रतिशत कटौती की बात की थी। हालांकि हाल ही में हुई छंटनी को लेकर कंपनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि कंपनी के स्ट्रैटेजिक एडजस्टमेंट के तहत कुछ पद प्रभावित जरूर हुए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इसका ग्राहकों या सरकारी परिचालन में कोई असर न पड़े।

 ट्रप से मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट : 

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप ने बोइंग को अमेरिकी वायुसेना का अब तक का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान बनाने का कॉन्ट्रेक्ट दिया। इसके चलते कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस कार्यक्रम के तहत अमेरिकी वायु सेना के लिए बनाए जाने वाले छठी पीढ़ी के इस फाइटर जेट को एफ 47 के नाम से जाना जाएगा, जो पांचवी पीढ़ी के एक-22 रेप्टर की जगह लेगा।

बेंगलुरू में अपने इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी सेंटर से एयरक्राफ्ट बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग ने 180 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। दरअसल ये कंपनी दुनिया भर के अपने ऑफिसेज में कर्मचारियों की संख्या कम कर रही है। बतादें कि भारत में बोइंग के लगभग 7000 से अधिक कर्मचारी हैं। बेंगलुरु और चेन्नई में बोइंग इंडिया इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (बीआईईटीसी) जटिल आधुनिक वैमानिकीकामकाज करता है।

इन चुनौतियों का कर रही सामना :

बेंगलुरु का इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी परिसर अमेरिका के बाहर कंपनी के सबसे बड़े निवेश में से है। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में बोइंग 300 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से सालाना करीब 1.25 अरब डॉलर की खरीद करती है।कंपनी ने कहा कि कुछ पुराने रोल खत्म किए जाने के साथ कुछ नए रोल भी क्रिएट किए गए हैं। भारत में ग्राहक सेवा, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर फोकस रखते हुए कंपनी ने इंटनी अधिक संतुलित तरीके से की है।

एडजस्टमेंट के पद प्रभावित :

बता दें कि बेंगलुरु और चेन्नई में बोइंग इंडिया इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर में एडवांस्ड एयरोस्पेस बनाने का काम होता है। बताया जा रहा है कि वर्तमान समय में बोइंग वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रही है।कंपनी ने पिछले साल अपने वर्कफोर्स में 10 प्रतिशत कटौती की बात की थी। हालांकि हाल ही में हुई छंटनी को लेकर कंपनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि कंपनी के स्ट्रैटेजिक एडजस्टमेंट के तहत कुछ पद प्रभावित जरूर हुए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इसका ग्राहकों या सरकारी परिचालन में कोई असर न पड़े।

 ट्रप से मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट : 

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप ने बोइंग को अमेरिकी वायुसेना का अब तक का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान बनाने का कॉन्ट्रेक्ट दिया। इसके चलते कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस कार्यक्रम के तहत अमेरिकी वायु सेना के लिए बनाए जाने वाले छठी पीढ़ी के इस फाइटर जेट को एफ 47 के नाम से जाना जाएगा, जो पांचवी पीढ़ी के एक-22 रेप्टर की जगह लेगा।

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