October 23, 2021

प्रॉविडेंट फंड में अंशदान, उस पर मिलने वाले ब्याज पर लगेगा टैक्स, जानिए आप पर कितना और कैसे पड़ेगा असर?

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 31 अगस्त को प्रॉविडेंट फंड (PF) में किए गए अंशदान और उससे मिलने वाले ब्याज को लेकर नए नियम जारी किए हैं। अब इसकी सीमा तय की गई है और अगर सीमा से ऊपर अंशदान या ब्याज मिलता है तो उस पर टैक्स चुकाना होगा। अब तक PF को टैक्स बचाने का साधन माना जाता था, जब इस पर ही टैक्स लगेगा तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है।

नया नियम क्या है?

फाइनेंस एक्ट 2021 में स्पष्ट प्रावधान बनाया था कि अगर कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड में 2.5 लाख रुपए से अधिक अंशदान करता है तो उस पर टैक्स लगेगा। हालांकि, अगर कर्मचारी के प्रॉविडेंट फंड में कंपनी का योगदान नहीं रहता है तो यह सीमा 2.5 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपए हो जाएगी।

इस तरह कानून में यह बदलाव बताता है कि प्रॉविडेंट फंड के भीतर भी दो अकाउंट बन जाएंगे- 1. टैक्सेबल और, 2. नॉन-टैक्सेबल कम्पोनेंट का। CBDT ने नोटिफिकेशन नंबर 95/2021 जारी कर रूल 9D को नोटिफाई किया, जिसमें प्रॉविडेंट फंड या मान्यता प्राप्त प्रॉविडेंट फंड में अंशदान पर मिले टैक्सेबल ब्याज की गणना के तरीके बताए गए हैं।

रूल 9D बताता है कि प्रॉविडेंट फंड में दो अलग-अलग खाते मेंटेन करने होंगे, जो इस प्रकार होंगे-

टैक्सेबल अंशदानः PF में होने वाले अंशदान का टैक्सेबल कम्पोनेंट (यानी सीमा से अधिक राशि PF में जमा करने पर) और उस पर मिला ब्याज। इस तरह के अकाउंट से विड्रॉ की गई राशि को उसमें से घटाना होगा।

नॉन-टैक्सेबल अंशदानः EPF खाते का 31 मार्च 2021 का क्लोजिंग बैलेंस। अंशदान में किया गया नॉन-टैक्सेबल हिस्सा और उस पर प्राप्त ब्याज। इस तरह के अकाउंट से विड्रॉ की गई राशि को उसमें से घटाना होगा।

यह नया नियम किसी व्यक्ति की ओर से टैक्सेबल अंशदान और नॉन-टैक्सेबल अंशदान पर वित्त वर्ष 2021-22 में और उसके बाद के वर्षों में लागू होगा। नया रूल 9D यह साफ करता है कि टैक्सेबल ब्याज कम्पोनेंट की गणना कैसे होगी। प्रत्येक व्यक्ति के दो अलग-अलग अकाउंट्स मेंटेन करना EPFO पर बोझ बढ़ाएगा। साथ ही उन कंपनियों के लिए भी जो अपने कर्मचारियों के EPF अकाउंट्स मैनेज करते हैं।

सरकार के इस कदम के पीछे क्या तर्क है?

इस साल के बजट तक प्रॉविडेंट फंड से आय पर टैक्स नहीं लगता था। ताकि रिटायरमेंट के समय लोगों को एकमुश्त राशि का लाभ मिल सके। फाइनेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग किया जा रहा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि कुछ लोग हर महीने अपने PF अकाउंट में 1 करोड़ रुपए तक का अंशदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि 1 करोड़ रुपए का अंशदान करने वाले की तुलना 2 लाख रुपए कमाने वाले और PF सेविंग्स पर 8% रिटर्न पाने वाले से नहीं की जा सकती। इस लाभ की ऊपरी सीमा तय होनी चाहिए ताकि उन पर टैक्स लगाया जा सके जो इन फंड्स में अपनी आय का अधिकांश हिस्सा डाल रहे हैं।

जब इसकी आलोचना हुई, तब राजस्व विभाग ने विस्तार से जवाब दिया। उसने कहा कि 1.23 लाख हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने 2018-19 में अपने इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) में 62,500 करोड़ रुपए जमा कराए। एक अकाउंट में तो 103 करोड़ रुपए का बैलेंस मिला है। वहीं, टॉप 20 HNIs का कुल बैलेंस 825 करोड़ रुपए है। 4.5 करोड़ EPF अकाउंट्स में सिर्फ 0.27% सदस्यों का औसत कॉर्पस फंड 5.92 करोड़ रुपए है। ये लोग बिना टैक्स चुकाए PF के बहाने 50 लाख रुपए सालाना तक कमा रहे हैं।

यह दूसरी बार है जब NDA सरकार ने EPF सेविंग्स पर टैक्स लगाया है। 2016 में बजट में घोषणा की गई थी कि विड्रॉल के समय 60% EPF अकाउंट बैलेंस पर टैक्स लगाया जाएगा। विरोध के बाद यह प्रस्ताव रद्द हो गया था। पिछले साल के बजट में EPF या नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) या सुपरएनुएशन प्लान जैसी इम्प्लॉई वेलफेयर स्कीम्स में नियोक्ता की ओर से योगदान को 7.5 लाख रुपए प्रतिवर्ष पर सीमित किया था।